Saturday, 27 August 2011

समकालीन लोग (हिंदी)

हिंदी , अंगरेजी और संस्कृत इन तीन भाषाओँ में मेरे अलग-अलग मित्रों के समुच्य हैं । पता नहीं यह 'समुच्य' शब्द कितना उचित है । मुझे इससे औपचारिक दूरी -सी बनती प्रतीत होती है पर हिंदी में मेरी गति ऐसी ही है । कम-से-कम मेरे चिर परिचितों ने भी तो हिन्दी में मेरे हस्तक्षेप को सहज मान लिया होता । पर ऐसा नहीं हुआ और यह ब्लॉग मैं विचारविमर्श एवं बहस , शिकायत आदि के लिए रखना चाहता हूँ ।

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